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कथा कैंची धाम की

हिमालय की गोद में बसे कुमाऊँ अंचल को प्रकृति ने दिल खोल कर सुंदरता का वरदान दिया है,यही एक अमूल्य अलौकिक धरोहर है कैंची धाम।

 सुना है यहाँ पहुचते ही सांसारिक मायाजाल में भटके मानव की समस्त व्याधिया शांत हो जाती हैं, शायद इसलिए ही यहाँ वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, अपार संख्या में भक्तजन व श्रद्धालु यहाँ पहुचकर अराधना व श्रद्धा पुष्प बाबा के चरणों में अर्पित करते हैं। 

यहाँ हर वर्ष 15 जून को एक विशाल भंडारे का आयोजन होता है,कहते हैं की यहाँ श्रद्धा एवं विनयपूर्वक की गयी पूजा कभी भी व्यर्थ नही जाती है। यहाँ  माँगी गयी मनौतियाँ पूर्ण होती है।  

इस धाम की स्थापना को लेकर कई रोचक कथाए जनमानस में प्रचलित हैं।

बाबा की कृपा से ही इस स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई,1962 के आस-पास बाबा यहाँ आये ओर इस धाम को स्थापित किया।

वो एक चमत्कारिक संत थे ,एक कथा के अनुसार माता सिद्धि व तुलाराम शाह के साथ बाबा नीम करौरी महाराज किसी वाहन से रानीखेत से नैनीताल को आ रहे थे तो ,अचानक वे कैंची धाम के पास उतर गए। इस बीच उन्होंने तुलाराम जी को बताया कि श्यामलाल अच्छा आदमी था, था शब्द सुनकर तुलाराम जी को, यह बात अच्छी नहीं लगी, क्योंकि श्यामलाल जी उनके समधी थे। भाषा में ‘था’ शब्द से वे बेरुखे से हो गये, किसी तरह मन को काबू में रखकर वे अपने गंतव्य स्थल को चल दिए। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनके समधी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया, बाबा ने दूर घटित घटना को बैठे-बैठे जान लिया था।
 इसी तरह एक चमत्कारिक घटना ओर हुई , जब आयोजित भंडारे में ‘घी’ की कमी पड़ गई थी, तब बाबा के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में जल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने हेतु जब उपयोग में लाया गया तो, वह जल घी में परिवर्तित हो गया। इस चमत्कार से आस्थावान भक्तजन नतमस्तक हो उठे।

एक अन्य चमत्कार के अनुसार बाबा ने गर्मी की तपती धूप में एक भक्त को बादल की छतरी बनवाकर उसे उसकी मंजिल तक पहुँचवाया। 

बाबा को यह स्थान बहुत प्रिय था। प्राय: हर गर्मियों में वे यहीं आकर निवास करते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। उस मन्दिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियाँ भी हैं, साथ ही अब यहाँ पर बाबा की एक भव्य मूर्ति स्थापित कर दी गयी है। 

यहाँ पर यात्रियों के ठहरने के लिए एक सुन्दर धर्मशाला भी है। यहाँ पर देश-विदेश के आये लोग प्रकृति का आनन्द लेते हैं। 
कैंची धाम आज किस्मत बनाने वाले धाम के नाम से विश्व भर में विख्यात है।

बाबा के भक्तों में एप्पल कंपनी के मालिक स्टीव जॉब्स भी आते थे, फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग और हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स बाबा की भक्त हैं। 
बाबा तो समाधी ले चुके हैं किन्तु कहते हैं की बाबा द्वारा स्थापित ये धाम बिगड़ी तकदीर बना देता है। देश-विदेश समेत हज़ारों लोग यहाँ अपनी बिगड़ी तक़दीर को बनवाने आते हैं।

जुकरबर्ग ने कहा था कि जब वे इस कन्फ्यूजन में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने इन्हें भारत के एक मंदिर में जाने की सलाह दी थी। वहीं से इन्हें कंपनी के लिए नया मिशन मिला। 

जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान उस मंदिर में भी गए थे ,वह मंदिर कैंची धाम था,जहाँ  एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को जाने के लिए कहा था।

आज बाबा का ये धाम कैंची धाम नाम से भी जाना जाता है।मंदिर के कुछ ट्रस्टी लोग बताते हैं कि ” गूगल के पूर्व डायरेक्टर लैरी ब्रिलियंट ने आश्रम में फ़ोन कर यह जानकारी दी थी कि मार्क जुकरबर्ग नाम का एक लड़का कैंची धाम आश्रम में आ रहा है और वह कुछ दिन यहाँ रुकेगा।” और मार्क जब यहाँ आये थे तो उनके पास मात्र एक पुस्तक थी। जुकरबर्ग आए तो एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहाँ दो दिन रुके थे।

जब प्रधानमंत्री मोदी एप्पल के वर्तमान सीईओ टिम कुक से मिले थे। कुक ने मोदी जी को बताया था कि, “हमारे फाउंडर स्टीव जॉब्स इन्सपिरेशन के लिए भारत गए थे। जॉब्स 1974 में आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में अपने कुछ दोस्तों के साथ बाबा से मिलने भारत आए थे। तब तक बाबा का निधन हो चुका था। लेकिन जॉब्स कुछ दिन आश्रम में ही रुके थे।“ मंदिर अधिकारियों का कहना है कि जूलिया रॉबर्ट्स, डॉक्टर रिचर्ड एल्पेर्ट जो ड्रग एलएसडी के प्रभाव पर रिसर्च करते हैं और मशहूर लेखक डेनियल भी यहाँ  आ चुके हैं।

बाबा की महिमा न्यारी है। भक्तजनों की माने तो बाबा की कृपा से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। यही कारण है की यहाँ भक्तों का सैलाब उमडा रहता है। 

कैंची धाम भवाली-अल्मोड़ा रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पर स्थित है। 24 मई 1962 को बाबा ने पावन चरण उस भूमि पर रखे, यहीं वर्तमान में कैंची धाम स्थित है, 1964 को मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई और तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है ओर एक विशाल भंडारे का आयोजन होता है। 

धाम ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरे सुरम्य जगह पर बना हुआ है, जहाँ बगल से ही नदी भी बहती है , धाम में हनुमान जी के अलावा भगवान राम एवं सीता माता तथा देवी दुर्गा जी के भी छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं।
यहाँ आने के लिए काठगोदाम सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है,जहाँ से बस, टेक्सियों आदि के माध्यम से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
स्वलिखित लेख 
सर्वाधिकार सुरक्षित

English Version 

Story of Kanchi Dham
 Nature has given a boon of beauty to Kumaon region nestled in the lap of the Himalayas, this is an invaluable supernatural heritage of Kanchi.

  It is heard that as soon as we reach here, all the diseases of human beings wandering in the worldly world may become calm, perhaps because of this there is a wave of devotees throughout the year.

 A large number of devotees and devotees reach here and offer worship and reverence at the feet of flowers Baba.

 Every year on June 15, a huge bhandara is organized, it is said that the worship done with reverence and humility here never goes in vain.  The wishes requested here are fulfilled.

 Many interesting stories about the establishment of this Dham are popular in the public.

 The temple was established at this place only by Baba's grace, around 1962 Baba came here and established this dham.

 He was a miraculous saint, according to a legend, Baba Neem Karori Maharaj with Mata Siddhi and Tularam Shah was coming from Ranikhet to Nainital in a vehicle, then suddenly he got down near the Kanchi Dham.  Meanwhile, he told Tularam ji that Shyamlal was a good man, Tularam ji did not like to hear the word, because Shyamlal ji was his cousin.  With the word 'was' in the language, he became disinterested, somehow kept his mind under control and left for his destination.  Later he came to know that his brother died due to stopping heart rate, Baba knew the incident that happened far away.

  Similarly, a miraculous incident occurred when there was a shortage of 'ghee' in the organized bhandara, then at Baba's order, water was brought into the canister from the river flowing below.  When it was used to make prasad, it turned into water ghee.  Faithful devotees woke up to this miracle.

 According to another miracle, Baba made a devotee in the scorching heat of summer by making an umbrella of a cloud to reach his destination.

 Baba loved this place very much.  They used to stay here every summer.  The devotees of Baba built a grand temple of Hanuman at this place.  Along with the idol of Hanuman in the temple, there are idols of other deities as well, now a grand idol of Baba has been installed here.

 There is also a beautiful Dharamshala for travelers to stay here.  People from all over the world enjoy nature here.

 The Kanchi Dham is today known worldwide as the fortune making fort.

 Baba's devotees also included Apple company owner Steve Jobs, Facebook chief Mark Zuckerberg and Hollywood actress Julia Roberts are Baba's devotees.

 Baba has already taken samadhi, but it is said that this dham established by Baba makes bad fortune.  Thousands of people, including India and abroad, come here to get their destiny destroyed.

 Zuckerberg said that Apple founder Steve Jobs advised him to visit a temple in India when he was in a confusion about whether Facebook should be sold or not.  From there, he got a new mission for the company.

 Zuckerberg had told that he stayed in India for a month.  During that time, he also visited the temple, which was the Kanchi Temple, where Apple founder Steve Jobs asked Facebook chief Mark Zuckerberg to go.

 Today Baba's Dham is also known by the name of Kanchi Dham. Some trustees of the temple tell that "Former Google director Larry Brilliant called the ashram and informed that a boy named Mark Zuckerberg came to the Kanchi Dham Ashram  And he will stay here for a few days. "  And when Mark came here, he had only one book.  He was here for a day when Zuckerberg arrived, but he stayed here for two days due to bad weather.

 When Prime Minister Modi met the current CEO of Apple, Tim Cook.  Cook had told Modi ji, "Our founder Steve Jobs went to India for inspiration.  Jobs came to India in 1974 to meet Baba with some of his friends in search of spiritual knowledge.  By then Baba had passed away.  But Jobs stayed in the ashram for a few days. "Temple officials say Julia Roberts, doctor Richard Alpert who researches on the effects of drug LSD and noted author Danielle have also come here.

 Baba's glory is unique.  If the devotees are to be believed, then by the grace of Baba all things become bad.  This is the reason that there is a huge influx of devotees here.

 Kanchi Dham is located on the banks of Bhawali-Almora Ranikhet National Highway.  On 24 May 1962, Baba placed the holy stage on that land, where the present-day Kanchi Dham is located, in 1964, the idol of Hanuman ji was revered in the temple and since then June 15 is celebrated as Pratishtham Day and a huge  Bhandare is organized.

 Dham is situated in a picturesque place surrounded by high mountains, where the river flows from the side, in addition to Hanuman ji, small temples of Lord Rama and Sita Mata and Goddess Durga are also built in the Dham.

 Kathgodam is the nearest railway station to reach here, from where one can easily reach here through buses, taxis etc.
 
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