महिमामयी देवभूमि - Glorious Dev Bhoomi सुधा का परिवार बरसों पहले शहर में बस गया था, इतने पहले की, सुधा के पिता भी शहर में ही पैदा हुये ओर वहीं पढ़ लिख कर वहीं नौकरी लग गये, यहाँ तक की उनका विवाह भी शहर से हो गया। सुधा के परिवार का गाँव से कोई नाता ही नही रहा ,जब तक सुधा के बूबू थे तो वो कभी कभार चले जाते थे, पर उनके अलावा सुधा के परिवार का कोई सदस्य गाँव नही गया था। वक़्त बीतता के साथ ही ,सुधा का परिवार पूरी तरह से शहरी रंग में ही रंग गया था, अब वो नाम के उत्तराखंडी थे, जो की उत्तराखण्ड मूल के थे, यही उनकी पहचान बची थी, उत्तराखण्ड के नाम पर। सुधा ने भी वहीं पढा, उसने एग्रीकल्चर सब्जेक्ट से पढ़ाई की ओर फिर बैंगलुरू में एक कम्पनी में नौकरी करने लग गई, जो की ऑर्गनिक फार्मिंग के क्षेत्र में काम करती थी। सुधा चूकिं एग्रीकल्चर फील्ड से थी तो वो वहाँ ऑर्गनिक खेती करने वालों किसानों के पास जाती रहती थी, उन्हें नई नई जानकारियाँ देने हेतु। वक़्त बीतता चला जा रहा था, सुधा नौकरी करने में व्यस्त थी,सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था की, अचानक उसके पिता की तबीयत खराब हो गई। सुधा बैंगलुरू से उन्हे...
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