पहाड़ों में ना केवल दृश्य ही सुंदर होते हैं, अपितु वहाँ के मकानों की बनावट भी अत्यंत मनोहारी होती है,लकड़ी व पत्थर से बने मकान व उसकी ढलवाँ ( पाख ) छत उसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती है। ऐसे ही एक पुरानी कुड़ी ( मकान ) मुझे अल्मोड़ा से थोडा़ सा पहले प्युडा होते हुये मुक्तेश्वर जाने वाली सड़क के किनारे दिखा, बिल्कुल खाली पड़ा था, शायद बरसों पहले उसे छोड़ दिया गया था। जब मैनें उसे देखा तो मन में ये सवाल उठता की इतनी सुंदर कुड़ी ( मकान ) को इस तरह क्यों छोड़ दिया गया होगा। सच कहूँ तो ये कुड़ी ( मकान ) मेरे ओर मेरे मित्र के मन मष्तिष्क में इतना घर कर गई थी, मेरा मित्र तो इसे खरीदने के लिये उतावला ही हो उठा, कुड़ी ( मकान ) ना केवल सुंदर थी अपितु आसपास के दृश्य भी अत्यंत सुंदर थे, हरे भरे पेड, रोड साइड पर बनी हुई, शाँत वातावरण से युक्त व व्यापारिक ओर रिहायशी दृष्टि से भी मुफीद जगह थी, वहाँ एक अच्छा होम स्टे भी चलाया जा सकता था। मैनें उस जगह की तस्वीर ली ओर लग गया इसके बारे में जानने के लिए की आखिर इसे ऐसे क्यों ओर किसलिए छोड़ दिया गया, आसपास के लोगों से काफी पता करने के ब...
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