जानकी दीदी को हम बचपन से देखते आ रहे थे, जब बहुत छोटी सी थी,तब उन पर से ईजा ( माँ ) का साया उठ गया था, नरी बू ने दूसरी ब्याह नहीं किया, वो ही उसके ईजा बौज्यू ( माँ बाप ) बन गए थे। बिन माँ की बच्ची को नरी बू ने पालपोस कर बड़ा कर दिया, अब जानकी दीदी स्कूल जाने लगी थी, तब उस इलाके में बहुत कम लड़कियाँ स्कूल जाया करती थी, खासतौर पर ठाकुर परिवार की लड़कियाँ ,जानकी दीदी तब इकलौती लड़की थी जो ठाकुर थी, अन्य एक दो लड़कियाँ ब्रहांम्ण थी। जानकी दीदी पढ़ने में होशियार थी उसने गाँव के इन्टर काँलेज में बारहवीं पास की, तब उसके बौज्यू ने उनको अल्मोड़ा भेज दिया पढ़ने के लिए। जानकी दीदी ने वहाँ मन लगाकर पढ़ाई करी ओर प्रथम श्रेणी से परीक्षा पास कर ली। इसी दौरान उनके बौज्यू ने उसकी शादी तय कर दी ओर जानकी दीदी की शादी हो गई थी। कुछ सालों बाद पता चला की जानकी दीदी का टीचर पद पर सलेक्शन हो गया था ओर उनकी पहली पोस्टिंग उसी स्कूल में हुई, जहाँ वो पढ़ती थी। जानकी दीदी ने आते ही, घर घर जाकर लोगों को समझाया की बालिकाओं को स्कूल भेंजें, उन्होंने अपना उदाहरण लोगों के सामने रखा। लोगों को भी उनकी ...
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