उत्तराखंड के छोटे छोटे कस्बों में अक्सर आपको खाने पीने की दुकानें मिल जाएँगी ,जो शहरों की तरह चमक धमक वाली तो नही, पर वहाँ उपलब्ध सामग्रियों का स्वाद गजब का होता है। ऐसे ही एक कस्बे में सड़क किनारे प्रेम दा का होटल नाम से छोटी सी दुकान है, जिसे उसी गाँव के प्रेम दा चलाते हैं, वहाँ से गुजरने वाले लोग ओर गाडियों की सवारियाँ, आते जाते रुक कर चाय नाश्ता ( Break fast )करते हैं। प्रेम दा अलसुबह ( Early morning )से ही दुकान के लिए सामान बनाने की तैयारियों में जुट जाते हैं, चने व आलू उबालना, मसाले पिसना इत्यादि। तैयारियाँ पूरी होते होते, दुकान खोलने का वक़्त होजाता ओर प्रेम दा, सब सामान लेकर दुकान की ओर चल पड़ते, उनका ये रोज का काम हुआ करता। दुकान जाकर भट्टी सुलगा दी जाती ओर प्रेम दा जुट जाते नाश्ता बनाने में, ताकि गाडियाँ आने से पहले सब सामान बन जाए। प्रेम दा का मेन्यू फिक्स हुआ करता, जिसमें उबले चने का छौंका लगा चना, उबले आलू के गुटुक, ककड़ी का रायता,आलू प्याज व सब्जियों को मिलाकर तैयार की गई पकौड़ी ओर सँग में गरम गरम चाय। सामग्रियाँ बनते बनते लोग आने शुरू...
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