उत्तराखण्ड में एक कहावत प्रचलित है की पहाड़ का पानी ओर पहाड़ की जवानी, पहाड़ के काम नही आती ओर ये एक हद तक ठीक भी है, पर इस कहावत को गलत साबित करने का प्रयास किया अपने हौंसले से मन्नू ने। मन्नू के बौज्यू ( पिता ) छोटी मोटी मजदूरी करके घर चलाते थे, दो जवान बेटियों की शादी की भी जिम्मेदारी सामने खड़ी थी, इसलिए उन्होनें मन्नू को भी स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़े भाई के पास दिल्ली भेज दिया, ताकि वो भी बड़े भाई की तरह कमा कर घर में कुछ मदद कर सके। मन्नू भी घर के हालातों से परिचित था के, कैसे उसके बौज्यू ( पिता ) दिन रात मेहनत करके घर चला रहे थे, इसलिए वो भी आगे पढ़ने का मानस छोड़ बड़े भाई के पास दिल्ली पहुँच गया। बड़े भाई ने जो की एक मोबाईल की दुकान में काम करता था, मन्नू को भी दुकान में लगवा दिया। मन्नू भी मन लगा कर काम करने लगा, वहाँ काम करने के दौरान उसने देखा की उसकी दुकान में मोबाईल रिपेयरिंग का काम करने वाला विनोद अन्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक वेतन पाता है, अगर वो भी ये काम सीख ले तो घर वालों की ज्यादा मदद कर पायेगा ,इसलिए उसने तय किया की वो भी ये काम सीखेगा। उ...
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