दिल बहादुर एक मेट ( नेपाली श्रमिक ) था, जो भवाली में लोगों का सामान इधर से उधर ले जाने का काम करता था। उसे भवाली आये शायद ज्यादा समय नही हुआ था,क्योकिं वो अभी तक यहाँ की जगहों से कम ही परिचित था। बिल्लू दा के साथ भवाली लेबर ढूँढने के दौरान, दिल बहादुर हमें मिला, लड़का ठीक लगा तो, बिल्लू दा अपनी ठेकेदारी वाली जगहों पर काम करने के लिये दिल बहादुर को ले आये। वैसे भी दिल बहादुर जैसे नये लड़के के लिये भवाली में करने को ज्यादा कुछ नही था, क्योकिं नया होने की वजह से ना तो उसे जगहों के बारे में जानकारी थी ओर ना ही वहाँ के लोगों से उसका कोई परिचय था, इसलिए बिल्लू दा के काम करने में उसे फायदा ही था। क्योकिं स्थान के परिचय बिना मेटों की कोई वकत नही होती, सामान को इधर से उधर पहुँचाने के लिये उन्हें क्षेत्रों का ज्ञान होना बेहद जरूरी होता है। यहाँ दिल बहादुर को रहने की जगह भी मिल गई ,ओर करने को लगातार काम भी, इससे उसको निरंतर आमदनी का जरिया मिल गया। वैसे दिल बहादुर भी बड़ा मेहनती लड़का था, मन लगा कर काम करता था, बिल्लू दा भी उससे खुश थे। बिल्लू दा की लेबरों में अगर ब...
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