पहाड़ में शराब के प्रचलन ने , कई घरों को उजाड़ दिया ठहरा , हमारे गाँव में ऐसा ही एक घर था हीरा काखी ( चाची ) का। चचा शराबखोरी के चलते काम धाम करते नही थे , उल्टा शराब पी कर काखी ( चाची ) को मारते पीटते थे , रोज का नियम सा था , घर में भूखे मरने की नौबत तक आ पहुँची थी। घर के जेवर भाँडे बर्तन तक बेच दिये ठहरे चचा ने , काखी ( चाची ) इसके चलते बहुत दुखी थी , जवान होती लड़की की शादी की कैसे होगी , इसकी चिंता उसे अलग सताती थी , शराबी बाप की बेटी को कौन ले जायेगा ये दुख अलग ठहरा , पर करती भी तो क्या करती। शराब पीने वालों का घर उजड़ रहा था , ओर शराब बेचने वाले फल फूल रहे थे , उनके गाँव का जग्गू शराब लाकर बेचता था , इस कारण हीरा काखी ( चाची ) के अलावा , कई घर बर्बाद हो रहे थे। एक दिन काखी ( चाची ) को चचा ने खूब पीट दिया ठहरा , काखी ( चाची ) ने ग़ुस्से में आकर कह दिया , बस बहुत हुआ आज के बाद , यदि हाथ उठाया तो मुझ से बुरा कोई नही होगा , ओर आज के बाद इस गाँव में , या तो मैं रहूँगी या ये शराब ही रहेगी , बहुत हुआ बहुत सह लिया। सच में काखी (चाची ) ने...
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