नब्बू का शुरुआती जीवन गाँव में ही बीता,बोज्यू फौज में थे तो परिवार अक्सर गाँव में ही रहा, कभी कभार ही वों बोज्यू के साथ ही रह पाते थे। नब्बू की 8 तक की पढ़ाई गाँव के ही स्कूल में हुई, शुरू से गाँव में ही रहने के कारण उसे गाँव से बेहद लगाव भी था। फिर नब्बू के बोज्यू ( पिता ) फौज की नौकरी से रिटायर्मेट होने के बाद,एक सिक्योरिटी कंपनी में सिक्योरिटी सुपरवाइजर की नौकरी लग गये,ओर अपने साथ अपने परिवार को भी वहीं ले गये। इसके चलते नब्बू को भी गाँव छोड़ कर जाना पड़ा, अब नब्बू शहर के स्कूल में जाने लग गया था, पर उसे गाँव व गाँव का स्कूल बहुत याद आता था, साथ ही उसके दगड़ी ( साथी ) भी। वक़्त बीतता गया नब्बू समय के साथ शहर की आबोहवा में ही घुल मिल गया, पढ़ाई पूरी हुई ओर फिर उसने ट्युर ओर ट्रेविल्ज्म का कोर्स कर लिया ओर एक अच्छी कंपनी में नौकरी लग गया। वो अक्सर ट्युरों के लिये नई नई जगहों की तलाश के लिये कंपनी की तरफ से इधर उधर भी जाता रहता था। ऐसे ही एक बार बॉस ने उसे होम स्टे कॉन्सेप्ट पर चलने वाले जगहों की तलाश के लिये हिमाचल भेजा। वहाँ नब्बू ने देखा की लोगों ने अपने घरों को ही, थोडा़...
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