गोप्प दा दिल्ली से एक कुत्ते का पिल्ला गाँव लेकर आये। उनके साहब की कुतिया ने चार बच्चे दिये ठहरे , जो गोप्प दा के माँगने पर साहब ने एक उनको भी दे दिया था बल। गोप्प दा उसे गाँव तो ले आये। गोप्प दा आते ही अपनी ईजा (माँ ) को बोले। कुकुर क पोथ ला री ( कुत्ते का बच्चा लाया हूँ ), कज्यो महँग छ ( बहुत महँगा है ) । ओर दोहर बात यो की ( ओर दूसरी बात ये की ) यो अंग्रेजी समझूँ (ये सिर्फ इंग्लिश समझता है ) येक ईज ले अंग्रेजी ही समझे ( इसकी माँ भी इंगलिश ही समझती है ) ये लिजी थोडा दिक्कत होली त्वेकं ( इसलिये थोड़ी दिक्कत होगी तुझे ) ईजा दिवि चार शब्द त्वेकं सीखण पड़ोल ( माँ दो चार इंगलिश के शब्द सीखने होंगें। तुझे )। ईजा तो ईजा ही ठहरी , बोली तू रोहण दे अंग्रेजी हन्ग्रेजी मैं येकं पाली ल्यौण , तेरी अंग्रेजी तेर पास राख (इस पर माँ बोली तू रहने दे अंग्रेजी हन्ग्रेजी , मैं इसको पाल लूँगी , तेरी अंग्रेजी तेरे पास ही रख ) मैंकें न बता कस्ये पालण छ ये कें ( मेरे को मत बता कैसे पालना है इसको )। गोप्प दा क्या कहते चुप रह गये , ओर छोड़ दिया ईजा पर की , जैसे पालती है पाल ले इस ...
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