#भिटोली चैत के महीने को प्रकृति की रंगत , जहाँ महत्वपूर्ण बनाने वाली ही ठहरी। वहीं दूसरी ओर भिटोली , इसे और ज्यादा रंगीला बनाने वाली ठहरी। इस महीने ब्याहतायें , अपने भाइयों ओर माता-पिता की ओर से , आने वाली भेंट का बेसब्री से इंतजार करती हैं। मगर पुष्पा के लिये ये त्यौंहार उदासी लाता था , क्योंकि ना ही उसके माँ बाप थे , ना ही कोई भाई बहिन। ब्याह होने के बाद ससुराल ही , उसका सब कुछ था। इसलिये भिटोली त्यौंहार आने पर , उसके दिल में हूक उठती थी के , काश कोई मुझे भी भिटोली देने वाला होता। बच्चे भी बोलते ईजा हमारे वहाँ कोई लगड , पू देने क्यों नही आता , तब पुष्पा का मन ओर भारी हो उठता। उसका भी मन करता की , वो भी आस पड़ौस में भिटोली बाँटे , पर शायद उसके नसीब में ये सब नही था। आज ज्यादा उदास होने के कारण वो मन बहलाने के लिये , जंगल की ओर गोरु भैंस के लिये घास लेने जा रही थी। तभी जोर की आवाज आई , मानो कुछ गिर गया हो। पुष्पा दौड़ कर उस ओर भागी , उसने देखा तो एक कार सड़क से नीचे गिर कर चीड़ के पेड़ में अटकी हुई है। वो भागती हुई वहाँ ...
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