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चनुली

चनुली की इंटर की परीक्षा थी , सेंटर हमारे गाँव में आया था। उसका गाँव इतना भी पास नही ठहरा की , रोज आ जा सके। इसलिये चनुली हमारे गाँव में , अपनी बुआ के घर पर ही रह कर पेपर दे रही थी।  पढ़ने में होशियार होगी , उसे देख कर ऐसा लगता था  , क्योंकि जब पढ़ाई करती दिखती तो , पूरी तरह उसी में डूबी दिखती।  पर वो सिर्फ किताबों में ही ,उलझी नही दिखी मुझे , शाम होने से पहले उसे घास के पूले काटते भी देखा था।  यानी कामकाजी भी थी चनुली , पर परीक्षाओं के दौरान उसका , ये सब करना ठीक नही लग रहा था , तो उसकी बुआ जो हमारी गाँव के रिश्ते में काखी लगती थी , उसको जाकर बोला की काखी चनुली के इम्तिहान चल रहे हैं , ओर तुम इससे घास कटवा रही हो।  इस पर काखी बोली च्याला ( बेटा ) तू ही समझा दे योई (यही ) बात जरा चनुली कें , मैं तो कै कै ( कह कह ) बेर ( कर ) थक गई , फिर ले न मानण ( मानती ) । मैंनें चनुली को बुलाया ओर उसे समझाया की , काम बाद में होता रहेगा , अभी इम्तिहान में ध्यान दे। चनुली बोली ददा ( भाई ) यों ले कोई काम भे ( है ) , यो तो मेर मूड फ्रेश करणक ( करने ) तरीक ( तरीका )...