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न्याय -भगवान कें घर देर है पर अंधेर नही

आज रात से ही घनघोर बारिश हो रही थी , उदुली ठुलईजा ( ताई ) के साथ साथ , पास में बैठा ठेप्पुवा कुकुर (कुत्ता ) भी चिंताग्रस्त था।  दोनों ही नही सोये थे , कुड़ी ( मकान ) काफी पुरानी हो चुकी थी , जगह जगह से टपक रही थी , जब बिजली कड़कती तो उसकी आवाज से , हिलती हुई सी महसूस ओर हो रही थी , उदुली ठुलईजा ( ताई ) मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी की , कुड़ी सही सलामत रहे।  पाख की लकड़ियाँ सड़ गल चुकी थी , बस भरान ( लकड़ी का बीम ) ठीक था , जो पाख को अब तक तो रोके हुये था।  पर आज पता नही क्यों , उदुली ठुलईजा ( ताई ) को लग रहा था की , कुड़ी ( मकान ) को कुछ हो ना जाये , कुड़ी ही सिर छुपाने का एकमात्र साधन था उनके लिये तो , खेती के नाम पर तो तीन चार छोटी छोटी गड़ी ( छोटी बाडीनुमा खेत ) रह गई थी बल।  रिश्तेदारों ने पता नही कब अपने नाम करवा ली , उदुली ठुलईजा को पता ही नही लगा।  ठुल ईजा के बच्चे थे नही , जब तक ठुलबाज्यू ( ताऊजी ) थे ठीक चल रहा था , उनके जाते ही बँटवारा हुआ , अच्छे खेत , अच्छी कुड़ी रिश्तेदारों ने अपने लिये रख ली , पुरानी कुड़ी ( पुरान...