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लैम्फू वाला राजन

राजन बहुत सालों बाद गाँव लौटा था, बौज्यू ( पिता ) के निधन के बाद तो वो जैसे गाँव को भूल सा ही गया था। राजन पढ़ लिख कर बैंक में नौकरी लग गया था, ओर बाद में ओर पढ़ाई करके भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर देश की सर्वोच्च नौकरी प्राप्त कर ली थी। कार्य की व्यस्तता चलते उसे गाँव आने का वक़्त ही नही मिल पाता था,इस बार बड़ी मुश्किल से वक़्त निकाल कर राजन गाँव आ पाया था। राजन ने आते ही मकान खोला तो, उसमें मकड़ी के जाले व धूल भरी हुई थी, गाँव के ही एक व्यक्ति को उसने साफ सफाई का ठेका दे दिया। जब साफ सफाई पूरी हो गई तो राजन अंदर घुसा ,अंदर घुसते ही उसकी नजर आले पर रखे लैम्फू पर पड़ी, ये वही लैम्फू था, जिसकी रोशनी में कभी राजन ने अपनी पढ़ाई की शुरुआत की थी। घर में वो दो लैम्फू आज भी मौजूद थे, एक वो जिसमें चिमनी नही थी, दूसरा वो जो राजन के बौज्यू ( पिता ) राजन को पढ़ते समय ठीक उजाला मिल सके, ये सोच कर गाँव की एक दुकान से उधार में ले कर आये थे। राजन उन्हें देख कर पुरानी यादों में खो गया ,कैसे इस लैम्फू ने खुद जल कर, उसकी जिंदगी रोशन की थी। उसे अपने वो पुरान...