मुखवा विलेज उत्तराखण्ड के चार धामों में से एक गंगोत्री धाम के कपाट जब शीतकाल में बंद हो जाते हैं , तब माँ गंगा की उत्सव डोली इस कपाट बंदी के बाद शीतकालीन पड़ाव मुखीमठ (मुखवा) के लिए रवाना होती है , ओर 6 महीने तक अब मुखवा स्थित गंगा मंदिर में ही मां गंगा की पूजा अर्चना होती है । परंपरागत ढोल दमाऊं की थाप के साथ तीर्थ पुरोहित गंगा की डोली को लेकर शीतकालीन प्रवास मुखवा गांव के लिए पैदल रवाना होते हैं । माँ गंगा मुखवा गांव के मंदिर में बिराजती है , यह गाँव गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों का भी गाँव है। माँ गंगा की भोगमूर्ति के इस शीतकालीन प्रवास स्थल को मुखीमठ भी कहा जाता है। मुखवा गांव उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 78 की दूरी पर स्थित है। यह गांव सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। इस गांव में साढ़े चार सौ परिवार रहते हैं। यहां परंपरागत शिल्प से तैयार लकड़ी के मकान अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है। मान्यताओं के अनुसार, वानप्रस्थ के दौरान विचरण करते हुये पांडव मुखवा गाँव पहुंचे थे और यहां पर उनका प्रवास रहा था। मार्कंडेय ...
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