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गुज्जू लाट - Dumb Gujju

गुज्जू बचपन से ही बोल नही पाता था, इसलिए लोगों उसे लाट ( गूँगा) बोलते थे। पर गुज्जू ना बोलकर भी लोगों को अपनी बात बखूबी समझा देता था। कोई ऐसा काम नही था जो उसे आता ना हो,हल जोतने , घास काटना, खाना बनाने से लेकर सारे कामों में महारत ठहरी उसे। गाँव में कोई भी कार्यक्रम हो गुज्जू से जरूर राय ली जाती थी, ओर कार्यक्रम का मुख्य आयोजनकर्ता वही हुआ करता था। अपने काम में वो अपने गूँगेपन को आड़े नही आने देता था, गाँव में कोई ऐसा नही था, जो उसकी बात को समझ ना पाये, उसके समझाने का तरीका ही ,ऐसा होता था की सामने वाला आसानी से उसकी बात समझ लेता था। गुज्जू की गाँव में ही रोड किनारे खाने पीने की एक छोटी सी दुकान भी थी, जहाँ चाय नाश्ते से लेकर खाना भी मिल जाता था। सुबह गुज्जू के दुकान के आलू के गुटुक व चाय फेमस थी, अदरक डली दुडबुड़ ( गाढी ) चाय का स्वाद ओर महक पीने वालों के जेहन में रच बस जाती। गुज्जू भी दिल खोल कर सामान डालता, किसी भी तरह की कोई कंजूसी उसने सीखी ही नही थी ओर उसकी वजह से उसके वहाँ की हर चीज का स्वाद लाजवाब होता था।  गुज्जू क...