गाँव में कमल दा अपने छोटे से परिवार के साथ रहता था, दो बच्चें व पुष्पा बोजी ( भाभी ) सहित चार प्राणी, कमल दा गाँव के लोगों के सिलेंडर लाने ले जाने का काम कर अपने परिवार का गुजारा चलाता था। हर बार की तरह गर्मियों में गाँव गया तो देखा की, कमल दा की जगह उनकी पत्नी यानी पुष्पा बोजी ( भाभी ) सिलेंडर ढोती दिखी। ये देख मैंनें ठुल ईजा ( ताईजी ) से पूछा ,ये कमल दा की जगह आज सिलेंडर पुष्पा बोजी ( भाभी ) क्यों ला रही है। इस पर ठुल ईजा ( ताईजी ) बोली कमल सिलेंडर लाते समय गिर गया था, खूट ( पैर ) टूट गया, इसलिए आजकल पुष्पा लाती है। कमल दा गरीब था या कहो हालात का मारा, जब बहुत छोटा सा माँ का देहांत हो गया ओर जब 7 - 8 साल का था तो बोज्यू ( पिता ) चल बसे थे। कमल दा परिवार में सबसे छोटा था, बड़े भाईयों ने बाप ( पिता ) के मरते ही बँटवारा कर लिया, कमल दा को छोटा देख सारी जमीन हथिया ली, एक छोटा सा मकान था, जिसमें कमल दा रहता था, वो भी कमल दा का था भी नही ये कमल दा को पता नही था, वो तो बस उसमें रह रहा था। थोडा़ बड़ा हुआ तो मजदूरी करके पेट पालने लगा, पर वो भी रोज नही मिल पाती थी, इसके च...
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