किशन दाज्यू पूरे गाँव में सबसे बुजुर्ग व्यक्ति थे , पर फेमस किशन दाज्यू के नाम से ही थे , ओर कोई रिश्ता लगा दो तो लोग पूछते , कौन किशन बल तब दाज्यू लगाते ही सब तुरंत समझ जाते की , किशन दाज्यू की बात हो रही है। कुर्ता पैजामा ओर सर पर टोपी ओर माथे पर टीका ये उनकी पहचान थी। सुबह ही नहा धो कर गाँव की इकलौती दुकान के बाहर आकर बैठ कर दुकानदार जमन दा को आवाज देकर ये बोलना की। ओ रे जमनिया आज दुकान नही खोलनी क्या , कैसे चलेगा रे तेरा काम , इतना आलस भी ठीक नही ठहरा रे जल्दी आ , ओर सुन चाय के साथ गुड थोडा बड़ा लेकर आना , कम पड़ जाता है रे। दुकानदार जमन दा भी भीतर से ही आवाज लगाता , होई किशन दा ग्लास में खित हालो बस लोनी ( ग्लास में चाय डाल दी बस ला रहा हूँ )। जमन दा दो स्टील के बडे गिलास में चाय लाता एक किशन दा के लिये ओर दूसरी खुद के लिये। पहले चाय पी जाती , फिर खोली जाती दुकान , रोज का नियम था। बिन दुकान में जाये किशन दाज्यू को चैन ना आता ओर बिन किशन दाज्यू के सँग चाय पिये बिना जमन दा को करार। चाय पी कर दुक...
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