कई बार हम जिसको नाकारा समझते हैं, वो ऐसा काम कर दिखाता है की, काम के समझे जाने वाले उसके सामने पानी भरते नजर आते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है बच्ची की,उसका नाम भले ही बच्ची सिह ठहरा, पर गाँव के लोगों ने उसे बिगाड़ कर बच्चियाँ कर दिया था ,पर बच्चियाँ था बहुत समझदार। पाँच भाई बहिनों में तीसरे नंबर का था बच्चियाँ, पढ़ने लिखने में भी होशियार ही था, जहाँ अन्य भाई अच्छे जीवन की तलाश में घर छोड़ गये, वहीं बच्चियाँ ये सोच कर बाहर नही गया के, कौन उसके ईजा बोज्यू को देखेगा ,ओर कौन जमीन जायदाद सम्भालेगा। भाई लोग अच्छी नौकरी करने के बाद भी, घर को तवज्जो नही देते थे, वहीं बच्चियाँ मेहनत मजदूरी करके, बड़ी लगन व निष्ठा के साथ घर बार सम्भाल रहा था। भाई लोग शादी होने के पहले तक, थोडा़ बहुत फिर भी देख लेते थे, शादी होने के बाद तो वो भी बंद कर दिया ठहरा,उल्टे जब भी गाँव आते,घर से घी, दालें व अन्य सामान ले जाते। बच्चियाँ भी उन्हें खुशी खुशी सब दे देता था,उसके मन में अपना पराए का ख्याल कभी आता ही नही था। भाई लोग बच्चियाँ को गाँव में रहने के कारण हयाव ( नाकारा ) समझते थे, बच्चिया...
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