अपने हुनर के माध्यम से, गाँवो से पलायन करने वाले लोगों के लिये एक उदाहरण थी आमा। आमा ने गाँव में रहकर ही, ना केवल खुद के लिये ही रोजगार का सृजन किया था ,अपितु गाँव के अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर रही थी। आमा से बातचीत के दौरान उनके इस हुनर की कहानी पता लगी, जो काफी रोचक है। आमा शुरू से ही हुनरमंद महिला थी, जैसा की आमा ने बताया, उन्होनें कहा बचपन में उन्हें स्वेटर बुनना उनकी आमा ( दादी ) ने सिखाया ओर उसे ओर उसमें निखार लाई थी उनकी ईजा ( माँ )। आमा ने बताया मेरी ईजा ( माँ ) सुँदर स्वेटर बुना करती थी, गजब के डिजाइन होते थे उनके बुने स्वेटरों में , लोग खूब खरीद कर ले जाते थे , आमा ( दादी ) ओर ईजा ( माँ ) तो दिन भर स्वेटर ही बुनती थी, फिर भी लोगों का पूरा नही हो पाता था। जब मैं थोडा़ बड़ी ओर समझदार हुई तो मुझे भी सीखा कर इसी काम में लगा दिया, मेरी आमा ( दादी ) कहती थी, ये तेरे काम आयेगा, कभी भूखे नही रहेगी, अगर इसे सीख लिया तो। मेरी शादी के बाद मेरा ये हुनर ही मेरे बहुत काम आया, जमीन कम होने से खेती सिर्फ खाने लायक ही हो पाती थी ऐसे में इस हुनर से ही, बाल बच्चों क...
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