घन्न दा की चेली ( बेटी ) मधु का जब अन्नप्राशन संस्कार हुआ था, तो उसने सबसे पहले कॉपी ओर पैन पकड़ा था बल, तब बामण (ब्रहामण ) ज्यूँ ने कहा था, घन्न दा लगता है ये बड़ी पढाकू बनेगी। जब मधु थोड़ी बड़ी हुई तो, वो सच में पढाकू निकली, उसे पैन कॉपी मिल जाती तो वो लिखने की कोशिश करती। 3 साल की होते ही घन्न दा ने उसे स्कूल में डाल दिया, ओर 6 महीने में ही,मधु ने बहुत कुछ सीख लिया था, जब घन्न दा उसे कंधे पर बिठा कर घर को लाते थे तो, वो सारे रास्ते स्कूल में पढ़ाया हुआ घन्न दा को सुनाते हुये आती, इस चक्कर में 5 पास घन्न दा को भी abcd याद हो गई थी। मधु घर आते ही सबसे पहले, स्कूल में दिया गया काम पूरा करती ओर फिर खाना खाती, उसका स्कूल का काम हमेशा अप टू डेट रहता था। जब उससे कोई पूछता की पढ़ लिख कर तू क्या बनेगी तो, मधु कहती ठुल साहब ( बड़ा साहब ) बनूँगी, अगर पूछने वाला बोलता की ठुल साहब ( बड़ा साहब ) बनने के लिये तो खूब पढ़ना पड़ता है तो, मधु बोलती मैं ले खूब पढून ( मैं भी खूब पढूंगी )। वास्तव में मधु पढ़ती भी थी, घन्न दा को वो जो भी किताबें लाने के लिये बोलती, घन्न दा वो किताबें प्रेम दा...
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