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जग दा की कुड़ी written by arjunbisht336 लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जग दा कुड़ी - जग दा का मकान

शहरफाटक से जब भी थोडा सा आगे निकलता तो , एक कुड़ी ( मकान ) मुझे बड़ा आकर्षित करती थी,  सुनसान जगह , आसपास कोई मकान नही , रोड किनारे बनी इस कुड़ी ( मकान ) में पता नही क्या खास बात थी के , मैं बाईक को रोक कर ,आते जाते हमेशा एकटक ,निहारता जरूर था कुछ देर के लिये।  देख कर बड़ा अच्छा लगता था , पर कभी कोई बड़ा व्यक्ति दिखाई नही देता था वहाँ , कुछ बच्चे अवश्य खेलते हुये दिखाई दे जाते थे , वो भी कभी कभार।  बड़ा मन होता था की , कभी कोई बड़ा दिखे तो बात कर लूँ  , इसी बहाने कुड़ी ( घर ) को नजदीक से देखने का मौका भी मिल जाये।  एक दिन ऐसा मौका मिल ही गया , आँगन में एक व्यक्ति बैठा नजर आ गया , मैंनें बाईक रोकी ओर  रामा श्यामा करी तो , बैठे हुये व्यक्ति ने जवाब देते हुये कहा , आ जाओ हो पाणी पी बेर जाला ( आ जाईये पानी पी कर जाना ) , मैं तो चाहता ही ये था , तुरंत से बाईक खड़ी कर ,चल दिया उस कुड़ी ( घर ) की तरफ। पूछने पर पता चला की उनका नाम जगत सिंह पडियार है , उनका गाँव वैसे तो नीचे है , पर रोड पर मकान लगा दिया सात आठ साल से।  बोले मन लगा रहता है बल यहाँ , इधर से चार...