हमारे गाँव से थोड़ी ही दूर एक जँगल था, जिसका नाम घोड़ी वन था, जो थोडा़ अजीब सा था। मैं सोचा भी करता की ये अजीब सा नाम क्या पड़ा होगा इस जँगल का, इस जँगल की लम्बाई होगी करीब 5 किमी ओर चौड़ाई होगी लगभग 2 किमी के करीब। इस जँगल की एक ओर विशेष बात ये थी की, जहाँ ओर जँगलों में जंगली वृक्ष हुआ करते हैं, वहीं इस जँगल में जंगली वृक्षों के साथ साथ फलों के पेड भी बहुतायत में थे,साथ ही वृक्ष भी करीने से लगे हुये थे, रास्ते के इर्द गिर्द जहाँ छायादार पेड थे ,वहीं फलों के पेड भी लगे हुये थे, आम, अमरूद के साथ साथ फलों की अनेक प्रजातियों के वृक्ष लगे हुये थे, एक स्थान पर तो लगभग आधा किमी एरिया में पहाड़ी केलों का जँगल ही लगा था, कुल मिलाकर बड़ा अचंभित कर देने वाली जगह थी ये घोड़ी वन। मैं जब भी वहाँ से नदी की ओर जाने के लिये गुजरता, वहाँ सीजन का कोई ना कोई फल जरूर उगा हुआ मिलता था, मुझे ये वन कम ओर फलों का बागान ज्यादा लगाता था। यहाँ से गुजरते समय मेरे मन में एक प्रश्न सैदेव उठता की, क्या ये अपने आप उगे हैं या किसी ने ये लगाए हैं, अगर अपने आप उगे हैं...
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