गाँव के इन बुजुर्ग को सब हौलदार बूबू के नाम से पुकारते थे, हम भी उन्हें इसी नाम से संबोधित करते थे, पर जेहन में ये सवाल उठता था की, इन्हे ही हौलदार नाम से क्यों संबोधित किया जाता होगा, जबकि गाँव में तो कई रिटायर हवलदार ओर भी थे। जब जिज्ञासा ज्यादा बढ़ी तो, एक दिन बूबू से ये सवाल कर लिया के बूबू आपको हौलदार बूबू जैसा नाम क्यों दे दिया ठहरा, इस बात पर बूबू ने पहले ठहाका लगाया ओर फिर बोले पोथिया ठहरा तो मैं सुबदार बल, पर तब गाँव वालों के लिये हौलदार ही बड़ा पद ठहरा तो हौलदार ही नाम कर दिया। बूबू बोले इलाके का पहला हौलदार बना था, तब फौज में कम ही लोग जाते थे, खेती जो करते थे, मैं थोडा़ उज्जड टाइप का था, तो बौज्यू ने सुधरने के लिये भर्ती करवा दिया था। दिन भर इधर उधर घूमने वाला हुआ, गाड ( नदी ) गया तो माछ ( मच्छी ) पकड़ लाया, जंगल गया तो कभी तैड (एक तरह का कंद मूल ) खोद लाया तो कभी बन ( जंगली ) मुर्गी पकड़ लाता ,खूब खाता पीता ओर मस्त रहता, सेहत भी अच्छी ठहरी ओर ताकत भी, इसलिए आराम से भर्ती भी हो गया। आगे की कहानी बताते हुये बूबू बोले भर्ती होने के बाद पता लगा की नौकरी कैसी होती है, व...
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