ईजा को कभी थकते नही देखा ठहरा , रात को सबसे लेट सोती ओर सुबह जब उठते तो जगी हुई मिलती , पता नही सोती भी थी के नही , रात में खट की आवाज भी हो जाये तो , तुरंत जग जाने वाली ठहरी। mother arjunbisht336 ईजा सिर्फ हमारी ही नही ठहरी , बकरी के पाठ ( बकरी का बच्चा ) भी ईजा को देखते ही दौड़ लगा के चले आते ,बाखई का भुर्री कुकुर ( भूरा कुत्ता ) भी लाड जताने चला आता , भैंस ओर उसका थोर देखते ही अड़ाने लग जाते। हम ईजा से कहते भी थे , तेर (तेरे ) कज्यो ( बहुत ) नानतीन ( बच्चे ) है गी याँ ( हो गये यहाँ )। arjunbisht336 ईजा ये सुन कर हँसने लगती ओर कहती , होय ( हाँ ) सब नानतीन (बच्चे ) तो छन (हैं ) म्यार (मेरे ) , इनोकें ( इनको ) जो दी दुलार , यो करनी उनुके ( उन्हें ) प्यार , ईजा सबकी दुलारी थी। mother सुबह उठ कर चाय रखना , एक चूल्हे में नहाने का पानी रखना , नाश्ते के लिये पिसु ( आटा ) ओल (गूंथ ) कर रोट (रोटी ) बनाना , इतने काम एक साथ ईजा पता नही कैसे कर लेती थी। पूरे दिन काम में उलझी रहने वाली ईजा के चेहरे पर कभी...
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