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उत्तराखण्ड की पृष्ठभूमि से जुड़ी लघु कथा बहादुर दा लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

बहादुर दा

बहादुर दा से भेट उनकी बकरियों को..!  जंगल ले जाते समय हो गई ठहरी...! दुबले पतले बहादुर दा बकरियों को..! हांकते हुये जंगल की ओर जा रहे थे..!   मैं भी चल दिया ठहरा उनके दिगड..!  ये सोच कर की थोडा पहाड़ों के बारे में...! जानकारी भी मिल जायेगी ओर घूमने का घूमना भी हो लेगा..! बहादुर दा बकरियों को कच्चे रास्ते से..!  ऊपर जंगल की ओर चलते जा रहे थे..! ओर मैं भी बात करता हुआ उनके पीछे चल रहा था..!  बातचीत के दौरान बहादुर दा ने बताया की..! उनके दो लड़के हैं , छोटा अभी पढ़ रहा है..! ओर बड़ा दस पास करके दिल्ली में नौकरी कर रहा है..! बडे बेटे की शादी भी कर दी पाँच साल पहले..!  ये सुन कर मैंनें उनसे पूछा..! बड़ा नौकरी करने लगा..!  तब तो थोडा सहारा मिला होगा बल..!  बहादुर दा बोले वो क्या सहारा देगा बल..! स्याणी को जबसे साथ लेकर गया है..! तब से तो उल्टा मुझसे..! पैसे माँग लेता है जरूरत पड़ने पर..! उसका आपरेशन से बच्चा हुआ तो 30 हजार भेजे ठहरे..!  पिछ्ले साल दिल्ली में एक नानु नान फ्लैट खरीदा..!  तब ले 3 लाख माँग कर ले गया..! म...