सुषमा आज उन पुरानी यादों में खो गई थी, जब उसने गाँव की महिलाओं को इकट्ठा करके अपने काम की शुरुआत की थी। सुषमा ने ना केवल अपनी जिंदगी बदल डाली, अपितु गाँव की महिलाओं सहित पूरे गाँव की किस्मत बदल डाली। सुषमा के एक छोटे से प्रयास ने गाँव में ऐसा परिवर्तन ला दिया था की , वो आसपास के इलाकों के लिये प्रेरणा स्त्रौत बन कर उभर गई। बात उन दिनों की है जब उत्तराखण्ड में ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन लगातार बढ़ रहा था, गाँव के गाँव खाली होने की कगार पर पहुँच चुके थे, सुषमा का गाँव भी इससे अछूता नही था, गाँव के अधिसंख्य युवा रोजगार गाँवो में रोजगार ना मिलने के कारण रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर चुके थे ओर गाँव में अब बचे थे तो सिर्फ महिलाएं, बच्चें ओर बुजुर्ग । पलायन होने से गाँव सूना हो चला था ओर रात में तो भयावह सा ही हो जाता था, गाँव की इक्का दुक्का दुकानें भी , पलायन के चलते बंद होने की कगार पर पहुँच चुकी थी। ये देख सुषमा बड़ी दुखी थी, उसने तो ऐसे माहौल की कल्पना भी नही की थी,वो चाहती थी की फिर से उसके गाँव की रौनक फिर से लौट आये, वो ये सोचती रहती थी की, ऐसा क्या कि...
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