खीम दा की पत्नी का निधन हो पड़ा था, छोटा सा बच्चा छोड़ गई थी, खीम दा के घर वालों ने बच्चें की परवरिश ठीक से हो,इसलिए उनकी दूसरी शादी करवा दी ठहरी। खीम दा के बोज्यू ( पिता ) ने काफी खोजबीन के बाद, सीधी सादी ओर गरीब घर की लड़की मधुली से खीम दा की शादी करवा दी। मधुली बोजी ( भाभी ) ने भी आते ही, घर बार सम्भाल लिया ठहरा, खासकर वो जिसके लिये उसे लाया गया था, यानी बच्चें की देखभाल। मधुली बोजी ( भाभी ) ने कभी मोहन को ईजा ( माँ ) की कमी नही होने दी ,ना ही उसे कभी ये अहसास होने दिया की ,वो उसकी सौती (सौतेली ) माँ है, ना ही कभी मोहन ने उसे सौती ( सौतेली ) माँ की नजर से देखा होगा। सारे घरवाले भी मधुली बोजी के व्यवहार से बड़े खुश ठहरे, उन्हें मोहन के लिये जैसी ईजा ( माँ ) चाहिये थी, मधुली बोजी ( भाभी ) ठीक वैसी ही थी। पर कहते हैं ना इस जगत में कोई सम्पूर्ण सुखी कोई नही, ऐसे ही कुछ मधुली बोजी ( भाभी ) के साथ हुआ,बगल की कुड़ी में रहने वाली खीमुली काखी ( चाची ) से मधुली बोजी ( भाभी ) का मोहन के चक्कर में झगड़ा हो गया ठहरा। खीमुली काखी ( चाची ) के लड़के ने मोहन को चूट ( पिट ) द...
To get stories,information of Uttrakhand,Uttrakhand tourism,UttrakhandCulture,Uttrakhand news and Uttrakhand Tourism visit us.