पित्तू दन दा एक छोटा सा कुकुड ( मुर्गा ) लाये थे , वो इतना छोटा सा था की ,उसका नाम ही पित्तू रख दिया ठहरा। दन दा का पित्तू था तो कुकुड ( मुर्गा ) , पर काम कुकुर (कुत्ते ) जैसे भी कर जाता था , कोई गैर दिख गया तो ,इतना हल्ला कर देता था की , बाखई के लोग एक बार ,बाहर आकर जरूर देखते की कौन अनजान आ गया। जब तक आया व्यक्ति घर के अंदर ना चला जाये , तब तक पित्तू, उसे घूरता हुआ, उसके आसपास ही घूमता रहता। कोई जानवर गलती से आ जाये पित्तू के एरिये में तो , उसको चोंच मार मार कर , जब तक खदेड़ नही डालता तब तक उसे चैन ना आता। बाखई के जानवरों को तंग करना तो ,उसका प्रिय शगल ठहरा , कभी सोये कुत्ते की पूछ में चोंच मार उठा देता , तो कभी भैंसों के ऊपर बैठ जाता। अजनबी बिल्लियों का तो पक्का दुश्मन ठहरा , बिल्ली दिखते ही तब तक शोर मचाता , जब तक बाखई वाले बिल्ली खदेड़ ना देते। बाखई का कोई बच्चा उसे गलती से छेड़ दे तो , पित्तू उसके खदेडे ( पीछे ) पड़ जाता ,ओर एक आद चोंच मारे बिना उसे छोड़ता नही था , इसलिये बाखई के बच्चे उससे छेड़खानी क...
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