सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

उत्तराखण्ड की पृष्ठभूमि से जुड़ी लघु कथा दगडी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दगडी

खीमुली , रमुली , कमई का ससुराल एक ही गाँव में था , ओर तीनों ही गजब की संगी ( सखियाँ ) ठहरी।  हर काम साथ ही होने वाला ठहरा इनका , घास काटने से लेकर , फसल आदि का काम दिगाड (साथ ) ही किया करते थे।  घास काटने जाते तो , जंगल इनके गाये गीतों से गूँज उठता , गाते गाते ही इतनी घास काट जाते की , गाँव का कोई ओर व्यक्ति ना ला पाये।  ऐसे ही खेत में काम करते वक़्त हाल ठहरा इनका , बोलते बुलाते कब खेत गोड जाते , इन्हें भी पता नही लगता।  पूरे गाँव में इनकी जोड़ी काम करने के मामले में अव्वल ठहरी , गोरु , भैंस भी काफी पाल रखे थे इन्होंने , ओर बकरियाँ इतनी पाली ठहरी के गिनती में ना आये।  तीनों एक साथ ग्वाले जाती , बकरियाँ भी क्या ठहरी गद्ददू ही मान लो , गोल मटोल एकदम तगड़ी बल , इसलिये आसपास गाँवों के लोग इनसे ही बकरियाँ खरीदने आते।  लकड़ियों का ढेर देखो , अनाज देखो , फल फूल देखो , धिनाली पानी देखो  सबसे ज्यादा इनके वहाँ ही होता , इनका बनाया घी का स्वाद भी बड़ा गजब था , आसपास इलाके में इनके जैसा घी कोई नही बनाता था , ...