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न्याय -भगवान कें घर देर है पर अंधेर नही


आज रात से ही घनघोर बारिश हो रही थी , उदुली ठुलईजा ( ताई ) के साथ साथ , पास में बैठा ठेप्पुवा कुकुर (कुत्ता ) भी चिंताग्रस्त था। 

दोनों ही नही सोये थे , कुड़ी ( मकान ) काफी पुरानी हो चुकी थी , जगह जगह से टपक रही थी , जब बिजली कड़कती तो उसकी आवाज से , हिलती हुई सी महसूस ओर हो रही थी , उदुली ठुलईजा ( ताई ) मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना कर रही थी की , कुड़ी सही सलामत रहे। 


पाख की लकड़ियाँ सड़ गल चुकी थी , बस भरान ( लकड़ी का बीम ) ठीक था , जो पाख को अब तक तो रोके हुये था। 


पर आज पता नही क्यों , उदुली ठुलईजा ( ताई ) को लग रहा था की , कुड़ी ( मकान ) को कुछ हो ना जाये , कुड़ी ही सिर छुपाने का एकमात्र साधन था उनके लिये तो , खेती के नाम पर तो तीन चार छोटी छोटी गड़ी ( छोटी बाडीनुमा खेत ) रह गई थी बल। 

रिश्तेदारों ने पता नही कब अपने नाम करवा ली , उदुली ठुलईजा को पता ही नही लगा। 


ठुल ईजा के बच्चे थे नही , जब तक ठुलबाज्यू ( ताऊजी ) थे ठीक चल रहा था , उनके जाते ही बँटवारा हुआ , अच्छे खेत , अच्छी कुड़ी रिश्तेदारों ने अपने लिये रख ली , पुरानी कुड़ी ( पुराना मकान ) ठुल ईजा को दे दी।  


ठुल ईजा ने भी नियति मान कर कुछ नही बोला , शायद ये सोचा हो की , कौन है मेरा अब इनके सिवा , मरूंगी तो यही कर्मकांड करेंगे। 


उसे कुड़ी ( मकान ) भी ऐसी दी की जो रहने लायक नही थी , गोठ ( गौशाला ) बना रखा ठहरा पहले उसे। 


ठुलईजा ने लीप पोत कर , उसे रहने लायक तो बना लिया था , पर पाख ( छत ) ठीक कराने के लिये उसके पास पैसे नही थे ,तो वो पहले जैसा ही रह गया। 


बरसात के मौसम में उसमें रहना खतरनाक होता था , पर आज तो बरसात ही खतरनाक हो रही थी , इसलिये उदुली ठुलईजा ज्यादा ही चिंतित थी। 

सुबह जब बारिश थोडी थमी , ठुलईजा बाहर निकल कर पाख को देख ही रही थी की , पाख ( छत ) भरभरा कर नीचे आ गया। 


ठुलईजा थरथरा उठी ये सोच कर की , रात में गिर जाता तो दब गई होती इसके अंदर ही। 

शोर सुनकर पूरा गाँव दौड़ा आया , ठुल ईजा को सुरक्षित देख सबने शुक्र मनाया , लोग टूटे घर के अंदर दबे सामान को बाहर निकालने में जुट गये , सब बर्तन भांडे टूट फूट चुके थे। 

घर साफ करते करते समय , लोगों को टूटी दीवार पर एक आला नजर आया , उसमें लोहे का एक छोटा सा बक्सा रखा था , ठुल ईजा ने देखा तो उसे समझ नही आया की , ये तो उसके पास नही था , फिर कहाँ से आया। 


जब उसने बक्सा खुलवाया तो सबकी आँखे फटी रह गई , उसमें सोने चाँदी के जेवर ओर चाँदी के ढेर सारे सिक्के रखे हुये थे। 
उस खजाने को देख ठुल ईजा के रिश्तेदार बोलने की , ये तो हम सबकी पुश्तैनी कुड़ी थी , इसलिये इन पर हमारा भी हक है , इस पर गाँव वाले भड़क गये ओर बोले जब बंटवारा किया था तब ठुल ईजा को ठीक तरह से हक दिया था। 


तुम लोगों ने तो अच्छे खेत , अच्छा मकान रख लिया , ओर ठुलईजा को क्या दिया , इतनी जमीन में से मात्र तीन चार छोटी छोटी गड़ी ( बाडी ) ओर ये टूटा मकान। 


तब नही दिखा तुम लोगों को की कैसा था बँटवारा , अब माल निकल गया तो हिस्सेदार हो रहे हो बल , भगवान ने ठुल ईजा के साथ न्याय कर दिया , इसलिये ये सब संपत्ति ठुलईजा की ही होगी , क्योंकि बँटवारा हो चुका ओर वो भी तुम लोगों ने ही किया , इसलिये तुम्हारा हक अब जाता रहा !

स्वरचित लघु कथा 
सर्वाधिकार सुरक्षित

English Version

 It was raining heavily since tonight, along with Uduli Thulaija (Tai), the nearby Thappuva Kukur (dog) was also worried.

 
Both had not slept, the kudi (house) was quite old, dripping from place to place, when the lightning struck, its voice was moving, feeling like a moving, Uduli Thulaija (Tai) mind to God  Was praying that the shirt be safe.


The wood was rotting, the bus bharan (wooden beam) was fine, which was still blocking the loop.


But today, I do not know why, Uduli Thulaija (Tai) felt that the kudi (house) may not be anything, the only means of hiding the head was for him, in the name of farming, there were three or four small carts.  The small farmland was left in power.


When relatives did not know when they got their names, Uduli Thulaija did not know.


Thul Eaja had no children, as long as Thulabajew (Tauji) was doing fine, he was divided as he left, good fields, good kudi relatives kept for themselves, gave the old kudi (old house) to Thul Eaja.


Thul Eaja also did not say anything as to destiny, may have thought that who is mine, except me, I will do the same rituals.


He was given a kudi (house) that was not worth living, he was kept Goth (Gaushala) before him.


Thulaija had made it worth living by doing a leap vessel, but he did not have the money to fix the pakha (roof), so it remained the same.


It was dangerous to live in it during the rainy season, but today the rain was becoming dangerous, so Uduli Thulaija was more worried.

 In the morning when the rain subsided, Thulija came out and was looking at the Pakha, the Pakh (roof) came down full.


Thulaija trembled, thinking that if she had fallen at night, she would have been buried inside it.


 Hearing the noise, the whole village came rushing, seeing Thul Eja safely, everyone celebrated Venus, people started to take out the items buried inside the broken house, all the utensils were broken.


While cleaning the house, people saw a niche on the broken wall, a small box of iron was placed in it, but when I saw Eja, he did not understand that it was not with him, then where he came from.


When he opened the box, everyone's eyes were cracked, there were gold silver jewelry and lots of silver coins.


 Seeing that treasure, relatives of Thula Eaja, to speak, it was our ancestral kudhi, so we also have the right over it.



 You guys have kept good fields, nice houses, and what did you give to Thulaija, only three to four small holes (badi) and this broken house.



 Then you did not show how you were divided, now that the goods are out, then you are becoming a shareholder, God has done justice to the stubborn, so all these assets will be given to the tulaija, because you have been divided and that too.  He did it, that's why his right now goes away!


 Scripted short story

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