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जय दत्त बूबू की हरी चाय - Green tea of jay dutt bubu

जय दत्त बूबू का पूरे गाँव में बड़ा दबदबा था , ओर होता भी क्यों नही , गाँव के सबसे सयाने होने के साथ साथ ,जड़ी बूटीयों का जबरदस्त ज्ञान जो ठहरा उनको , आदमी को देख उसके मर्ज को ,समझ जो जाते थे, जय दत्त बूबू ( दादा )। 

लगभग 90 से ऊपर होने के बावजूद अभी तक जड़ी बूटी चुनने के लिये रोज जंगल जाते , सुबह नित्यकर्म से निवृत होने व नहाने व पूजापाठ करने के बाद।  

वो एक बड़ा स्टील का गिलास ,कोई हरी सी चाय गुड की डली के साथ पीते , ओर फिर झोला कंधे में लटकाये निकल पड़ते जंगल की ओर , घाम ( धूप )  तेज होने के  साथ ही वापस अपने घर लौट आते , आते ही मंडुवे ( रागी ) की दो रोटी ओर सब्जी लेकर उसे अपने पेट में उदरस्थ करते , फिर शुरू होता झोला खाली करने का काम। 
उसमें से निकालते एक एक करके अपनी जड़ी बूटियाँ , जिसे सुखाना होता उसे चटाई बिछा कर सुखाया जाता ओर बाकी को उनके हिसाब से कूटा ओर पिसा जाता। 

तब तक दाल भात खाने का टाईम हो जाता , खा पी कर फिर से काम में लग जाते , दोपहर का एक बज जाता , फिर होता दूर दूर से मरीजों का आना चालू , एक एक करके सबको देखा जाता , पुड़िया दी जाती औषधि लेने का तरीका बताया जाता , कुछ खाने पीने का परहेज होता तो वो भी बतलाते। 

इस तरह सबको देखते हुये शाम के तीन साढ़े तीन बज जाते ,तब तक उनका वही हरी चाय पीने का वक़्त हो जाता , जिसे वो अपने हाथों से तैयार करते ,उसे छान कर गुड की डली के साथ आँगन में बैठ कर पीते। 

मैं जब भी जाता सारा ध्यान ,उनकी हरी चाय पर होता की ,वो आख़िर इसे पीते क्यों हैं ओर उससे फायदे क्या होते हैं , क्योंकि ये जरूर पता था की ,जय दत्त बूबू इसे यों ही तो नही पीते होंगें, जरूर कुछ उसमें कुछ ऐसा होगा जो जय दत्त बूबू जैसा खांटी व्यक्ति ,बेमतलब की चीज़े नही खाते वो बिना नागा इसे पीते हैं।  

उनके व्यस्त होने के कारण ,उनसे हरी चाय के बारे में पूछ नही पाता था , पर उस हरी चाय के प्रति जिज्ञासा मुझे जयदत्त बूबू से ,सवाल पूछने को उकसाती रहती थी। 

एक दिन मौका दिख गया ठहरा , बारिश होने से जयदत्त बूबू के पास लोग बाग इक्का दुक्का ही आये , आज जल्दी फ्री भी गये ठहरे , ओर हरी चाय पीने का वक़्त भी हो गया ठहरा तो , पूछने के लिये बढ़िया समय था। 

बस सवाल दाग मारा की बूबू ये हरी चाय का क्या हिसाब है , जो आप जैसा व्यक्ति इसका दीवाना ठहरा , सवाल पूछते ही जयदत्त बूबू ने बोला तू भी पियेगा क्या तब तो तेरे लिये भी बनाऊं , ये सुनते ही तत्काल बिन सोचे समझे  मेरे मुँह से हाँ निकला की होय बूबू मैं भी पिऊगा ( हाँ बूबू मैं भी पिऊँगा )। 

बूबू बोले देख रे नाती ( पोता ) ये चाय ठहरी संजीवनी बूटी ,कितनी ही बीमारियों के लिये रामबाण औषधि है ये, पर लोग तो दूध ओर चाय पत्ती वाली चाय के शौकीन ठहरे , इसलिये इस अमृत बूटी को नही पीते , हेय समझते हैं , बस अंग्रेज़ों द्वारा डाली गई आदत के चलते चाय को हड़काते हैं जो नुकसान करती है, ओर जो ये पत्ते है ना ,उसको हमारे पहाड़ में हेय समझते हैं , बोलते हैं की इसको तो वो खाता है जो गरीब ठहरा बल , अब बता कौन पहाड़ी अपने को गरीब दिखायेगा बल , इसलिये इसको हेय समझते हैं ओर मंडुवे ( रागी ) को भी।  
जबकि दोनों पहाड़ की संजीवनी ठहरी , ये जो चाय हैं ना वो बिच्छु बूटी के पत्ते  , इसका साग ( सब्जी ) भी बनने वाला ठहरा,  पर लोग खाते नही , जबकि ना जाने कितनी बीमारियों को खत्म करती है ये , ओर ना जाने कितना पोषण प्रदान करती है ये। 

जयदत्त बूबू ये सब बताते हुये ,इससे ठीक होने वाली बीमारियों के बारे में बताते चले गये , मैं मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनता चला गया , उनके ज्ञान पर नतमस्तक होता चला गया। 

इतने में वो हरी चाय तैयार हो गई , गुड की डली ओर स्टील के गिलास में ,अब जयदत्त बूबू की वो हरी चाय मेरे हाथ में थी , पिया तो जोर की लगी , ओर एक चीज जो मुझे तत्काल मुझे महसूस हुई वो थी , शरीर को जो ठंड महसूस हो रही थी , उसमें गर्मी सी महसूस होने लगी थी , बाकी के फायदे तो मुझे गूगल में सर्च करके पता करने थे पीने के बाद। 

जब बिच्छु बूटी सर्च किया गूगल पर तो ,खोपडी घूम गई ठहरी, क्योंकि जो अभी अभी मैंनें पी थी उसकी कीमत ही 1000/- रुपये से लेकर 2000/- रू के बीच थी , यानी अभी मैंनें 2000/- रू किलो वाली चाय पी थी ये अहसास ही मुझे अलग अनुभूति प्रदान कर रहा था। 

अब जानना था की इससे फायदा क्या होता है , जब पढ़ने लगा तो जो जानकारी मुझे मिली वो देख आँखे फट गई मेरी की , जयदत्त बूबू की हरी चाय सच में संजीवनी पेय है!

स्वरचित लघु कथा 
सर्वाधिकार सुरक्षित

English Version 

Jay dutt Bubu's Green Tea
 Jay Dutt Bubu's great influence in the whole village, and even if there is no force, he is the most grown-up of the village, as well as the tremendous knowledge of herbs that stopped him, seeing the man and understood his merge, Jay Dutt Bubu ( grandfather ).

 In spite of being above 90, till now, we used to go to the forest everyday to choose herbs, in the morning after retirement, and after bathing and worshiping.

 Drink a big steel glass, some green tea with jaggry nuggets, and then hang the satchel in the shoulder, towards the forest, as the heat (sunshine) intensifies and return to your home, as soon as you come to Manduve (Ragi)  Taking two breads and vegetables, let it grow in your stomach, then the job of emptying the bag begins.

 By extracting from it one by one, her herbs, which had to be dried, were dried by laying a mat and the rest would be crushed and ground according to them.

 By then, it would be time to eat pulse rice, eat and drink and then work again, it would have been one o'clock in the afternoon, then patients would come from far and wide, everyone was seen one by one, the method of taking medicines was given to the women.  It is said that he would have told to avoid eating something.

 In this way, looking at everyone, it would be three o'clock in the evening at three and a half, then it was time for them to drink the same green tea, which they prepared with their hands, filter it and sit in the courtyard.

 Whenever I went, all the attention was on his green tea, why did he drink it after all and what are the benefits from it, because he definitely knew that Jay Dutt bubu does not drink it just like that, there must be something in it that will be Jay Dutt bubu.  Like a person who does not eat meaningless things, they drink it without any reason.

 I was unable to ask him because of his busyness, but curiosity about that green tea kept me from asking questions to Jay dutt Bubu.

 One day the opportunity was seen, due to the rain, people came to the garden near Jay dutt Bubu, today also got free, and it was time to drink green tea, it was a good time to ask.

 Just stain the question, what is the account of this green tea, Bubu, which the person like you was obsessed with, Jay dutt Bubu said when you ask the question, will you drink it, then I should make it for you as well;  Yes it turned out that I would drink Bubu.

 Bubu said, see this tea is a panacea for many diseases its like a sanjeevani herb, but people are fond of tea with milk and tea leaves, so they do not drink this nectar, hey, they are just put by the British  Due to habit, we grab tea which causes damage, and those leaves which do not stay or consider it as hay in our mountain, say that it eats that which is a poor force, now tell which hill will show itself as poor, hence  This is considered as hay and also manduve (ragi).

 While both of the mountains remain lifeless, these tea are nettle leaves, it is also considered to be a vegetable (vegetable), but people do not eat it, while not knowing how many diseases it eradicates, and how much  It provides nutrition.

 Jay dutt Bubu went on to tell about all the diseases that could be cured by this, I was fascinated listening to them, bowed down to his knowledge.

 In that case, that green tea was ready, now I had that green tea of ​​Jay dutt Bubu , I drank it, and one thing that I immediately felt was that of the body  I was feeling cold, I was feeling hot in it, the rest of the benefits I had to search in Google and find out, after drinking.

 When searching the nettle herb, the skull turned around on Google, because the price of what I had just drunk was Rs 2000 / kg, that is, I had just drank tea of ​​Rs 2000 / -, the feeling that gave me a different feeling  having had.

 Now I had to know what is the benefit of this, when I started reading, I got the information I saw, my eyes were torn, Jay dutt Bubu's green tea is truly a lifelong drink!

 Scripted short story
 All rights reserved

टिप्पणियाँ

  1. बहुत बढ़िया। सुंदर चित्रण के लिए बधाई।
    ऐसा ही एक चरित्र पहाड़ी थीम पर मेरे नाटक कब होगी भेंट में था।
    यहाँ देखें https://www.youtube.com/watch?v=71SFZBJV-dk

    जवाब देंहटाएं
  2. पर आपने इसको बनाने का तरीका नही बताया, वह भी बता दें, हमारे घर के चारों तरफ तो विछू ही उगे हैं।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आदरणीय इसके पत्तों को सूखा कर चाय बनाई जाती है , अधिक जानकारी लेने के लिये आप गूगल पर देखें वहाँ पूरा तरीका यकीनन होगा।

      हटाएं
  3. ऐसा लगा कि सब आँखो के सामने घूमने लगा
    बुबु की हरी अमृत चाय

    जवाब देंहटाएं
  4. ऐसा लगा कि सब आँखो के सामने घूमने लगा
    बुबु की हरी अमृत चाय

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  5. ऐसा लगा कि सब आँखो के सामने घूमने लगा
    बुबु की हरी अमृत चाय

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