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जम्म बू की चूडकानी

जम्म बू द्वारा बनाई गई चूड़कानी बडी स्वादिष्ट होती थी , पता नही क्या डालते थे की , खाने वाला अंगुलियाँ ही चाटता रह जाता था। 

जब भी गाँव जाना होता तो , जम्म बू के हाथ की चूड़कानी खाये बिना नही लौटता , भात के साथ चूड़कानी का स्वाद बड़ा मस्त लगता था। 

जम्म बू भात भी बरबरान ( ना सूखा ना ही गीला ) बनाते , जिसमें चूड़कानी मिला कर खाने का मजा ही कुछ ओर होता था।  

आँगन में लगे चूल्हे पर भात ओर चूड़कानी पकती , जिसे जम्म बू बडे मनोवेग से पकाते , साथ में लाई के पत्तों (राई के पत्तों का साग ) का टपकिया भी होता था।  

मेरा जैसा व्यक्ति जो कम खाता था , वो भी दो बार भात डलवा लेता , ओर चूड़कानी कितनी बार डलवा लेता ये तो गिनता नही था , साथ में टपकिया भी माँग लेता। 

खाते खाते ये भी सोचता की , बूबू क्या सोचेंगे की कितना खा रहा है ये , पर पेट बोलता माँग ले , फिर पता नही कब मिले ऎसी चूड़कानी , ओर मैं पेट की सुन कर माँग लेता था। 

बूबू भी कहते शरम जन करिये ला (शर्म मत करना ) , तेर थ ले बना राखो (तेरे लिये भी बनाया है )  , तेर आमे ली बता राख छी की तू आरे छे ,(तेरी अम्मा ने बता दिया था की तू आया हुआ है ) ये सुन कर तो ओर थोडा खाने का मन कर जाता। 

बूबू की चूड़कानी का मैं मुरीद था , काले भट्ट की चूड़कानी वाकई लाजवाब होती थी , पीस्यु ( आटा का घोल ) का बिशवार उसे गाढापन प्रदान करता था , साधारण सी दिखने वाली इस चूड़कानी का ना केवल स्वाद ही अनूठा होता अपितु इसके औषधीय गुण इसको विशेषता प्रदान करते थे। 

विश्व भर में black beans के नाम से पहचाने जाने वाले , इस भट्ट में बड़ा पोषण होता। 

शायद हमारे बडे बूढ़ों को इसका पता था की , पहाड़ों में रहने वालों के लिये ये बेहद पौष्टिक आहार है , तभी इसे स्वाद में ढाल कर उपयोग में लिया जाता होगा।  

मुझे इसके पोषण के गुणों का तो तब पता नही था , पर इसके अनूठे स्वाद के कारण मुझे ये बेहद पसंद था!
स्वरचित लघु कथा 
सर्वाधिकार सुरक्षित

English Version 

 
Chukrani made by Jmm  Boo was very tasty, I don't know what to put, the eater used to lick fingers.

 Whenever I had to go to the village, I would not have returned without eating the hand of Jmm Boo, the taste of chukrani with bhat (rice) was very pleasant.

 Jumm boo bhat (rice) was also prepared by barbaran (neither dry nor wet), in which the fun of eating with chukrani was some other way.

 The bhat (rice) and chukrani were cooked on the fire in the courtyard, which was cooked by Jmm boo big impuls, along with green vegitable of lai leaves (greens of rye leaves).

 A person like me, who used to eat less, would also take Bhat (rice) twice, and would not count the number of times he would get chukrani, but would also ask for drip.

 While eating, he would also think, how would Bubu think how much he is eating, but ask for his stomach, then I do not know when I got such a shout, and I used to listen to my stomach.

 Bubu also says sharam jana kare la (Do not be ashamed), Ter the le bana asho (made for you too), Ter aame li tell ash chhi ki aare chhe, (Your Amma had told that you have come)  On hearing this, he would feel like eating a little more.

 I was a fan of bubu ki chukrani, the black bhat (black beans) was really wonderful, the peasya (flour mixture) biswara gave it a thickness, this simple looking chukrani would not only have a unique flavor but its  Medicinal properties gave it specialty.

 Known as black beans all over the world, this bhat would have great nutrition.

 Perhaps our elders knew that this is a very nutritious diet for the people living in the mountains, then it must have been used to enhance the taste.

 I did not know its nutritional properties then, but I loved it because of its unique taste!
 Scripted short story
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