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जोश कैफे

भैरब जोशी रोड किनारे चाय का खोमचा चलाते थे , खोमचे का नाम रखा ठहरा जोशी टी स्टाल , ठीक ठाक चलने वाली ठहरी , खर्चा पानी निकल जाने वाला हुआ , सब कुछ ठीक चल रहा था।

एक दिन अचानक उनकी तबीयत खराब हो पड़ी , इलाज हुआ ओर ठीक भी हो गये पर  डाक्टर ने उन्हें लंबे आराम की जरूरत बताई , ऐसे में दुकान बंद हो पड़ी , दुकान बंद होने से पैसे पानी की दिक्कत हो गई , दुकान ही सहारा हुई जोशी जी की तो , ओर कोई दूसरा काम भी नही ठहरा , घर परेशानी में आ गया , दो स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे , घर ओर जोशी जी की दवाईयों के खर्च के लाले पड़ गये ठहरे। 

ऐसे में एक दिन जोशी जी की पत्नी बोली... मैं खोले ली छु दुकान ( मैं खोल लेती हूँ दुकान ) , थोडा सहार लाग जाल ( थोडा सहारा लग जायेगा ), येस्ये तो भूख मर जोण ( ऐसे तो भूखे मर जाएंगे ) , तुमर दवाई कस्ये आल ( तुम्हारी दवाई कैसे आयेगी ) , घरक खर्च कस्ये चलोल (घर का खर्च कैसे चलेगा )। 

इस पर जोशी जी ने न चाहते हुये भी हाँ बोल दी , उनके पास कोई दूसरा चारा भी नही था , उनकी पत्नी दूसरे दिन ही दुकान गई , दुकान की साफ सफाई की ओर दुकान का जरुरी सामान रख कर दुकान शुरू कर दी,लोग भी चाय पीने आने लगे।

जोशी जी की पत्नी चाय अच्छा बनाती थी तो , थोड़े ही दिनों में आसपास प्रसिद्ध भी हो गये उनके चाय व पकौड़े , लोगों के अलावा पास के स्कूल के काफी सारे बच्चे भी चाय पकौड़े खाने आते थे , जोशी जी की पत्नी जितना अच्छा चाय पकौड़े बनाती , उतना ही अच्छा उनका व्यवहार ठहरा , स्कूली बच्चे उनके व्यवहार से खासतौर पर प्रभावित थे।

एक दिन काफी सारे बच्चे एकसाथ आये ओर जोशी जी की पत्नी से बोले..  आपको पता है आज मातृ दिवस है , ओर इसलिये हम आपको कुछ देना चाहते हैं , जोशी जी की पत्नी बोली.. ये क्या होता है बल मातृ दिवस , मैं ठहरी गाँव की बल हमको नही पता मातृ हात्र दिवस ,  बच्चे बोले मातृ दिवस मतलब माँ का दिन , ओर आप हम सबको माँ जैसी लगती हो , आपकी तरह कोई दूसरा दुकानदार नही खिलाता पिलाता हमें , जबकि आप बिल्कुल माँ की तरह खिलाती हो हमें।

इस पर जोशी जी की पत्नी बोली..अरे मैं तो तुमर खाई पैस ली छु ( अरे मैं तो इसके पैसे लेती हूँ ) , कोई माँ थोडी ना ली अपण नानतिन्हा पैंस ( कोई माँ थोडी ना लेती है अपने बच्चों से पैसे ) 

बच्चे बोले.. तो क्या हुआ ये आपकी दुकानदारी है , पर आप जिस प्रेम से खिलाती हो ना वो माँ का सा प्रेम लगता है।

अब जोशी जी की पत्नी निरुत्तर थी , फिर बोली ठीक छ , ठीक छ जो मर्जी छ करो , पर करला की यो तो बताओ , इस पर बच्चे बोले.. हम इस दुकान को चित्रों से सजाना चाहते हैं , ओर एक माँ के साथ सच्चा मातृ दिवस मनाना चाहते हैं।

जोशी जी की पत्नी बोली..  ठीक है बल पर पहले चाय के साथ पकौड़े खाने पड़ेंगे , वो भी बिन पैसे दिये आज इस दिवस पर।
 
बच्चे चाय पकौड़े खाने के बाद काम में जुट गये , ओर डिजाइनों को खोमचे पर उकेरने में मशगूल हो गये , जब काम खत्म हुआ तो जोशी टी स्टाल , जोश कैफे में बदल चुकी थी। 

बच्चे बोले आज से आपकी इस दुकान का नाम जोश कैफे है , क्योंकि आपकी चाय व पकौड़े व आपका व्यवहार कुछ अच्छा करने का जोश जगा देता है!

स्वरचित लघु कथा 
सर्वाधिकार सुरक्षित

English Version 

Josh cafe 

Bhairab Joshi used to run tea Khomcha ( Small wodden shop ) along the road, Khomache was named as Joshi Tea Stall, the work was going on well, the water was going to drain, everything was going well.


 One day suddenly his health worsened, he was treated and healed, but the doctor told him that he needed long rest, in such a situation, the shop was closed, the money closed due to closure of the shop, the shop was supported.  However, there was no other work, the house got in trouble, two young children going to school, came home to pay for the expenses of Joshi's medicines.


 One day Joshi ji's wife said ... I opened Khule li chu shop (I open shop), a little Sahar log jal (a little help will be imposed), Yesye toh hunger zoan (Such will die hungry), your  Dwaay kasaye ala (how will your medicine come), household expenses kasaye chalol (how will household expenses go).


 On this Joshi ji said yes despite not wanting, he had no other option, his wife went to the shop the next day, started the shop keeping the necessary items of the shop towards the cleaning of the shop, people also tea.  Started drinking,


 When Joshi ji's wife used to make tea, his tea and dumplings became famous in a few days, besides people, many children from the nearby school also used to come to eat tea pakoras, as good as Joshi ji's wife would make tea pakoras.  , Equally good was his behavior, the school children were particularly impressed with his behavior.


 One day many children came together and said to Joshi ji's wife .. You know today is Mother's Day, and that's why we want to give you something, Joshi ji's wife said .. What happens force mother's day, I stayed  We do not know the strength of the village, Mother Hatra Day, children said Mother's Day means Mother's day, and you all look like mother to us, no other shopkeeper like you feeds us while you feed us like a mother.


 On this Joshi ji's wife said..Are main to thar kha pais li chu (hey I take money for this), no mother does not take any money from her children (no mother takes money from her children)


 Children said, so what happened is your shopkeeping, but the love you feed does not feel like a mother's love.


 Now Joshi ji's wife was speechless, then she said right, please do whatever you want, but tell me what you want, children speak on it .. We want to decorate this shop with pictures, and a true mother with a mother.  Want to celebrate the day


 Joshi ji's wife said .. Ok, we have to eat pakoras with tea first on the strength, that too without giving money today on this day.


The children started working after eating tea pakoras, and got busy engraving the designs on the floor, when the work was over Joshi Tea Stall had turned into Josh Cafe.


 Children said that from today onwards, the name of this shop is Josh Cafe, because your tea and pakoras and your behavior arouse the enthusiasm to do something good!

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